मैं कौन हूं? कौन हूं मैं?
उगते सूरज की असीमित फैलती किरण हूं मैं या
अमावस की कालीमा में गुम चंद्रमा हूं मैं,
हर दिशा में बेखौफ बेहती हवा हूं मैं या
चिराग में बंद जिन हूं मैं?
अमावस की कालीमा में गुम चंद्रमा हूं मैं,
हर दिशा में बेखौफ बेहती हवा हूं मैं या
चिराग में बंद जिन हूं मैं?
डोर से टूटी हुई लेहरती पतंग हूं मैं या
ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ कैदी हूं मैं?
आकाश में उड़ता हुआ पंछी हूं मैं या
जाल में फंसा हुआ पक्षी हूं मैं?
आज़ाद हुं मैं या कैद हूं मैं?
पर्वतों के शिखरौं को छूता हुआ बादल हूं मैं या बादल में कैद पानी हूं मैं?
कभी यहां कभी वहां बरस्ता सावन हूं मैं या
मीलों जमी हुई बर्फ़ हूं मैं?
धरती की गोद में छलकती हुई नदी हूं मैं या
ठहरा हुआ तालाब का पनी हूं मैं?
कभी तूफानी लहर कभी ओस की बूंद हूं मैं या कभी आंखों में छुपा हुआ आंसू हूं मैं?
आज़ाद हुं मैं या कैद हूं मैं?
कौन हूं मैं?
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